इस धरती पर सबसे अधिक हैरान कर देने वाला प्राणी इंसान है । इंसान के दिल दिमाग में ,कब क्या चल रहा होता है , कोई नहीं समझ सकता । इंसानी मस्तिष्क जब कुछ बोल रहा है तो जरूरी नहीं कि वो वही सोच भी रहा हो । यह उस बनाने वाले ने बहुत ही नेक कार्य किया है कि हम हकीकत में किसी के दिमाग को पढ़ नहीं सकते। पर हां कुछ क्रिया कलाप से हम सामने वाले की मानव मनोविज्ञान के बारे में अंदाज़ा जरूर लगा सकते हैं। 

किसी भी इंसान के विचार दूसरे इंसान से नहीं मिलते हैं। हर इंसान का अपना सोचने का ढंग है और हर कोई अपने ही किये कार्य और सोच को श्रेष्ठ समझता है। मानव मस्तिष्क सोच विचार का अड्डा है जहां हर वक़्त कोई न कोई कार्य ,सोच चलती रहती है । और इतने सोच विचार करने पर यह जानना भी रोचक है कि हम मानव अपने दिमाग का सिर्फ कुछ प्रतिशत हिस्सा ही इस्तेमाल करते हैं। इसी कुछ मानव मनोविज्ञान से इंसान ने हर तरफ अपनी पकड़ बना कर यह दुनिया बसा रखी है। 

मानव मनोविज्ञान की परिभाषा

मनोविज्ञान क्या है? मानव मन के रोचक तथ्य क्या हैं ? इसको जानने से पहले मनोविज्ञान की परिभाषा समझना जरूरी है । मनोविज्ञान, मानव मस्तिष्क और उसके कार्यों के अध्ययन का वैज्ञानिक तरीका है. विकिपीडिया के अनुसार मानव मनोविज्ञान और व्यवहार का विज्ञान है. यह मनुष्य की चेतना और अवचेतना अवस्थाओं का अध्ययन है, हम दोनों अवस्था में कुछ न कुछ अजब गज़ब कार्य सोचते करते रहते हैं।

इस मनोविज्ञान के भी कई अंग है –

पर्सनल मनोविज्ञान – इसमें मानव के मस्तिष्क में क्या चल रहा है यह जानने की कोशिश रहती है। वह कब सकरात्मक सोच रहा है ,कब नेगिटिव इसके बारे में पता लगाया जाता है। 

सोशल मनोविज्ञान – इसमे समाजिक तौर पर जो परिवर्तन होते हैं उसका मानव मनोविज्ञान पर क्या असर होता है यह जानने की कोशिश रहती है। हमारे आसपास की हर घटना मानव मस्तिष्क को बदल सकती है ।

क्लिनिकल मनोविज्ञान – इसमे मानव मन के अवसाद ,बीमारी ,आदि के बारे में पता लगाया जाता है और उसी के तहत इलाज किया जाता है। 

जैविक मनोविज्ञान – इसमे जैविकीय रूप से परिवर्तन मानव दिमाग पर असर डालते हैं और यह परिवर्तन किस तरह से मानव मनोविज्ञान को बदल देते हैं उस के बारे में जाना जाता है । आजकल के घटने वाले माहौल से हम यह अच्छे से समझ सकते हैं। 

मानव मनोविज्ञान के बाकी अंग समझने के लिए इसके लिए अभी भी बहुत रिसर्च जारी है । मानव मन को समझना आसान कार्य नहीं हैं । फिर भी अब तक के किये गए ख़ोज और अध्यन से हम कुछ रोचक बातें और तथ्य समझ सकतें है । और जान सकते हैं कि किन सोच विचार और अपने अदभुत मस्तिष्क के कारण मनुष्य और धरती पर बसने वाले प्राणियों से अलग है। हालांकि यह आसान कार्य नहीं है ,क्योंकि हर व्यक्ति की अपनी सोच समझ है ,जो किसी भी एक कार्य को अपने ढंग से सोचता है। 

मानव मस्तिष्क के कुछ रोचक तथ्य –

  1. जिस तरह से मानव का विकास हुआ है वह तेज़ी से बदला है उसमें उसके मस्तिष्क के बदलाव को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है ,जैसे आजकल के बच्चे जिस तरह चिन्तित रहते हैं ,आज से कई साल पहले 1950 के दशक में इसको दिमागी बीमारी समझा जाता था। है न  रोचक और समझने वाली बात कि हम सबने जेनरेशन से जनरेशन कितना मानव मनोविज्ञान में बदलाव कर लिया है ,अपने लिए ज़िन्दगी कितनी मुश्किल कर ली है । 
  2. जिस तरह से हम सब आज के वक़्त में फोन पर निर्भर है ,वह हमारे लिए इतना उपयोगी हो चुका है कि यदि यह खराब हो जाये तो हमें अपनी मौत के समय लगने वाला झटका सा महसूस होता है। 
  3. इंसान सब बराबर है पर एक औरत और आदमी का दिमाग अलग तरीके से सोचता हैI अगर किसी पुरुष को किसी की बात से दुख या तकलीफ हुई हो तो वह उस बात को भूल जाते हैं, लेकिन माफ़ नहीं करते। लेकिन अगर एक महिला को किसी की बात से तकलीफ पहुंची हो, तो वो माफ़ कर देती हैं, लेकिन भूलती नहीं है।
  4. हम खुद को पॉजीटिव रखने के लिए यह समझाते हैं कि भूल जाओ आगे बढ़ो। पर इंसानी मनोविज्ञान से यह समझे तो सबसे मुश्किल काम है क्योंकि हम अक्सर उन्हीं बातों और पलों को याद करते हैं।
  5. हम बचपन से अपने बड़ों से अक्सर सुनते हैं कि कोई भी काम पूरा होने से पहले किसी को बताएं नहीं ,क्योंकि वह पूरा नहीं होता है । जबकि इस के पीछे मनोविज्ञान कारण यह है कि हम उस काम को करने की प्रेरणा खो देते हैं और वह काम फिर पूरा नहीं हो पाता हैI
  6. कुछ लोग बोलते बहुत अच्छा है कुछ लिखते बहुत अच्छा है। पर मनोविज्ञान खोज करने पर यह रोचक तथ्य पाया गया है कि 90% लोग मैसेज़ या पत्र में वह चीज़े लिखते हैं जिन्हें वह कह नही सकते।
  7. क्या आप जानते हैं कि जब हम 18 से 33 साल की उम्र में होते हैं तो सबसे ज्यादा तनाव में रहते हैं ,हालाँकि शोध करने पर यह पाया गया है कि यह तनाव जेनेटिक से भी प्रभावित हो सकता है ।
  8. इंसानी फितरत के बारे में एक रोचक तथ्य यह भी है कि जो जितना हंसता ,ठहाके लगाता है उतना ही दिल से अंदर से उदास होता है । वह सिर्फ हंसी को अपना कवच बनाता है ।
  9. आपको गाने सुनना कैसा लगता है ,म्यूजिक हमेशा हमारे दिमाग को शांत और ठंडा रखता है ,पर इसके बारे में भी एक रोचक तथ्य यह है कि हम खुद को उन्हीं गानों के साथ जोड़ पाते हैं जो हमारी ज़िंदगी को बताते हैं और उनसे जुड़े होते हैं।
  10. प्यार मोहब्बत की बातें आजकल के वक़्त में सच्ची नहीं लगती है ,पर रोचक तथ्य यह है कि इंसानी दिल दिमाग को जब कोई पसन्द आता है या प्यार करता है तो सिर्फ पहले 4 मिनट में वह कर लेता है।
  11. प्यार से ही जुड़ा होता है विश्वास पर एक मजेदार तथ्य यह है इसके बारे में कि यदि आप अपनी भावनाओं को छिपाओगे तो दूसरे व्यक्ति के लिए आपको समझना उतना ही मुश्किल होगा. क्योंकि ऐसा करने से आप दूसरे की नज़रों में अपनी विश्वासनीयता खो सकते हैं।
  12. क्या आप जानते हैं कि आपका दिमाग आधे से ज्यादा समय केवल यादें दोहराता रहता है.और जब कोई हमें नजरंदाज यानि इग्नोर करता है तो वही रसायन यानि कैमिकल रिलीज होता हैं जो हमें चोट लगने पर होता है।और जब किसी से प्यार होता है तो हमारा शरीर इसमें कुछ खास नहीं करता, बस दिमाग एक केमिकल रिलिज़ करता है जिससे हमें अलग-सा अच्छा अनुभव होता है। यानी कि प्यार भी एक केमिकल का लोचा है। यह भी एक सच है कि किसी के साथ ज्यादा समय बिताने से आप उसकी आदतें अपनानें लगते हैं इसलिए सोच-समझकर दोस्त बनाएं।
  13. दुनिया को दूसरे लोगों की ज़िंदगी में बहुत रुचि होती है पर लोग आपके बारे में अच्छा सुनने पर कम यकीन करते हैं लेकिन बुरा सुनने पर तुरंत यकीन कर लेते हैं. ऐसा संभवत: “सर्वाइवल इंस्टिक्ट” के कारण होता है, जो जानवरों में ज्यादा पाई जाती है।
  14. अपने इस वक़्त की मिली ज़िन्दगी से बहुत कम लोग खुश होते हैं  अधिकतर 90% लोगो का दिमाग ये सोचता हैं कि कुछ पल के लिए समय पीछे चला जाए.
  15. मनोवैज्ञानिकों की मानें तो सामान्यतौर पर हमारे मस्तिष्क में 6000 विचार प्रतिदिन चलते हैं और इन सभी विचारों में से 80 प्रतिशत विचार नकारात्मक ही होते हैं। फिर चाहे हम अपने कॅरियर के बारे में नकारात्मक सोच रहे हों या फिर अपने परिवार के बारे में।और यह नेगटिव सोच हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर करती है ,जिस से हम जल्दी बीमार हो सकते हैं।
  16. जिन व्यक्तियों में सेल्फ कॉन्फिडेंस कम होता है वह अक्सर दूसरों में कमी निकलाते रहते हैं। 
  17. डिप्रेशन में जाना ज्यादा सोचने का नतीजा है। इस समय हमारा दिमाग उन समस्या को बनाने लगता है जो होती ही नहीं है । इस लिए इस से बचे ।
  18. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार जिन लोगों को अपनी मातृ भाषा के आलावा कोई अन्य भाषा भी आती है वे लोग ज्यादा बेहतर तरीके से निर्णय लेने में सक्षम रहते हैं।
  19. जिन लोगों का आई क्यू लेवल अधिक होता है वह सोशल कम होते हैं क्योंकि उनका दिमाग हर वक़्त किसी न किसी समस्या को हल करने में लगा होता है ।
  20. यदि आपका मन अक्सर भटकता है तो 85% संभावना है आप अपने अंदर छिपे हुए अवचेतन मन से दुखी है ।

मानव मन बहुत विचित्र है । जितना इसके बारे में जानेंगे उतना ही यह रोचक विषय है ।